अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप, अंतरिक्ष नीति में वित्त-बीमा को लेकर चाहते हैं स्पष्टता


(सागर कुलकर्णी)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप एक नयी अंतरिक्ष नीति का इंतजार कर रहे हैं ताकि वित्त तक पहुंच आसान हो और अप्रिय घटनाओं की स्थिति में दायित्व से संबंधित मुद्दों पर स्पष्टता हो। फिलहाल देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में कम से कम 100 स्टार्टअप सक्रिय हैं जो उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और कक्षा में घूम रहे उपग्रहों के लिए ईंधन भरने वाले यान को डिजाइन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गत बुधवार को संसद को बताया था कि, ‘‘अंतरिक्ष गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी एक नई अंतरिक्ष नीति पर काम किया जा रहा है।’’

गत जून में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण की बड़ी पहल के तहत टाटा प्ले के आर्डर पर पहले मांग संचालित उपग्रह के प्रक्षेपण की ऐतिहासिक घटना देखी गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) अंतरिक्ष क्षेत्र के दो भारतीय स्टार्टअप का पेलोड लेकर रवाना हुआ।

‘ध्रुव स्पेस’ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय नेक्कांति ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘आज बाजार बहुत बंटा हुआ है। हम, ध्रुव स्पेस में, तीन काम करते हैं, ग्राहकों के लिए उपग्रह निर्माण, प्रेक्षपण यान के साथ इंटरफेस और उत्पाद जिन्हें उपग्रहों के संचालन के लिए ग्राहक के स्थानों पर तैनात किया जा सके।

ध्रुव स्पेस की योजना इस साल के अंत तक थाइबोल्ट-1 और थाइबोल्ट-2 उपग्रह प्रक्षेपित करने की है ताकि ग्राहकों को अपने उपग्रहों का प्रस्ताव देने से पहले सभी प्रणाली को परखा जा सके।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज और ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ के एक अध्ययन ने वर्ष 2020-21 के वित्त वर्ष के लिए भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को पांच अरब डॉलर का आंका था।

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा, ‘‘हमारे पास पूंजीपतियों और निवेशकों का अच्छा निवेश है। लेकिन वित्त पोषण के अगले चरण में सरकार या निजी क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी आगे आएंगे।’’

भट्ट ने कहा, ‘‘इस नवजात उद्योग के विकास के लिए उदार ऋण, कर अवकाश, उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन जैसे प्रस्ताव की पेशकश करनी होगी।’’

स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन कुमार चांदना ने कहा, ‘‘हम सरकारी अंतरिक्ष संस्थाओं के साथ बराबरी के मुकाबले की उम्मीद करते हैं, क्योंकि नीतियां आम तौर पर निजी खिलाड़ियों के लिए अधिक कठोर होती हैं।’’ स्काईरूट विक्रम श्रृंखला के खुद के रॉकेट बना रही है, जिससे उपग्रह प्रक्षेपण कम खर्चीला होगा।

उपग्रह प्रणोदन प्रणाली का निर्माण कर रही ‘मनास्तु स्पेस’ अंतरिक्ष में संपत्ति के स्वामित्व और उनके उपयोग पर अंतरिक्ष नीति में स्पष्टता चाहती है।

मनास्तु स्पेस के सीईओ तुषार जाधव जानना चाहते हैं कि दुर्घटना होने पर क्या देनदारी और दंड हैं। जाधव की कंपनी का लक्ष्य कक्षा में उपग्रहों के लिए एक ईंधन स्टेशन बनाना है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने और क्षेत्र के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की तर्ज पर एक प्रभावी नियामक ढांचे पर स्पष्टता की मांग की।

जाधव ने घरेलू और विदेशी बाजारों में भारतीय कंपनियों के लिए समान अवसर की वकालत की। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि अगर भारत की तुलना में अमेरिका में कारोबार करना आसान है, तो कोई यहां कारोबार क्यों करेगा। स्काईरूट के चांदना ने भी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए बीमा नीतियों पर सरकार से मदद मांगी।



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