ईडी छापेमारी में जिन रुपयों और प्रॉपर्टी को सीज करती है उसका क्या होता है?


ईडी यानी एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट जब कहीं छापेमारी करती है तो टैक्स चोरी किया हुआ पैसा और दूसरी चीजें जब्त करती है। ईडी (Enforcement Department) इन दिनों जबरदस्त एक्शन में भी है। ईडी ने भ्रष्ट व्यापारियों, नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ लगातार छापे मारकर उनके करोड़ों रुपये नगद और अवैध संपत्ति को भी जब्त किया है। इन छापों के मद्देनजर ये सवाल यह उठता है कि आखिर ईडी जब्त कि हुई इस नगद राशि का करती क्या है? वह कौन सा ठिकाना है जहां खरबों की इस राशि को रखा जाता है? वहीं जिन प्रॉपर्टी को सीज किया जाता है उनका क्या होता है? चलिए आपको बताते हैं।

ED

कहां जाता है जब्त किया हुआ कैश

ईडी जब नगद, सामग्री या प्रॉपर्टी की जब्ती करती है तो बाद में उसका आंकलन किया जाता है। इसके बाद जब्त हुए सामान की बाकायदा एक विस्तृत रिपोर्ट या पंचनामा बनाकर फाइल किया जाता है। ईडी भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों को बरामद रकम की गिनती करने के लिए बुलाती है। इस दौरान नोट गिनने की मशीन की मदद से नोटों की गिनती खत्म होने के बाद ईडी के अधिकारी बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में जब्ती सूची तैयार करते हैं। इसके बाद जब्त हुई नगद राशि को ईडी के किसी भी सरकारी बैंक अकाउंट में जमा कर दिया जाता है। इसमें एक बात और है कि अगर जब्त हुई राशि, सामान या जेवरात पर किसी भी तरह का निशान हो तो ईडी उसे सील किए हुए लिफाफे में रखती है, जिससे उसे सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया जा सके।

कहां होता है जब्त रुपयों का इस्तेमाल

जब्त किए गए रुपयों का इस्तेमाल प्रवर्तन निदेशालय, बैंक या सरकार द्वारा नहीं किया जा सकता है। एजेंसी एक अंतिम कुर्की आदेश तैयार करती है और जारी करती है। कुर्की की पुष्टि करने के लिए मामला अदालत के सामने जाता है। इसके बाद मुकदमा समाप्त होने तक पैसा बैंक में पड़ा रहता है। इसके बाद यदि आरोपी को दोषी ठहराया जाता है, तो नकद राशि केंद्र की संपत्ति बन जाती है और यदि आरोपी को अदालत द्वारा बरी कर दिया जाता है, तो नकद राशि वापस कर दी जाती है।

क्या होता है प्रॉपर्टी का

ED पीएमएलए के मुताबिक केवल 180 दिन तक ही प्रॉपर्टी को अपने पास रख सकती है। मतलब कोर्ट में अगर आरोपी साबित हो जाता है तो प्रॉपर्टी सरकार की और अगर नहीं होता है तो प्रॉपर्टी जिसकी थी उसी की हो जाती है। कई बार ऐसा भी होता है कि ईडी जिस संपत्ति को अटैच कर रही है उस मामले की अदालत में सुनवाई जारी रहने के दौरान आरोपी उस संपत्ति का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन फाइनल फैसला कोर्ट का ही होता है कि प्रॉपर्टी किसके पास जाएगी। मतलब अदालत अगर प्रॉपर्टी सीज करने का आदेश देती है तो प्रॉपर्टी पर हक सरकार का हो जाता है अगर ईडी आरोपी पर आरोप साबित नहीं कर पाती है तो प्रॉपर्टी मालिक को वापस कर दी जाती है। कई बार कोर्ट प्रॉपर्टी के मालिक पर कुछ फाइन लगाकर प्रॉपर्टी वापस लौटा दी जाती है।

तीन महीने में 100 करोड़ से ज्यादा रुपये हुए हैं जब्त

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ईडी ने पिछले तीन महीनों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस दौरान ईडी ने 100 करोड़ से ज्यादा रुपये जब्त किए हैं। इसमें अभी हाल ही में एक मोबाइल गेमिंग एप्लिकेशन से संबंधित धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता के एक व्यवसायी के आवास से 17 करोड़ रुपये से अधिक की जब्त हुई है। ईडी के अधिकारियों ने कैश गिनने की मशीन के साथ करीब आठ बैंक अधिकारियों को बुलाया गया था। पश्चिम बंगाल एसएससी घोटाले के सिलसिले में निलंबित मंत्री पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के अपार्टमेंट से 50 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।



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