सहकारी शिक्षा कोष एनसीयूआई के पास ही बने रहना चाहिए: अध्यक्ष


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| Updated: Jul 31, 2022, 8:46 PM

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) भारतीय राष् ट्रीय सहकारिता संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने रविवार को कहा कि सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए कोष एकत्रित करने और उसे बनाए रखने का अधिकार सरकार को खत्म नहीं करना चाहिए। सहकारी शिक्षा कोष का गठन बहुराज्य सहकारिता समिति (एमएससीएस) अधिनियम, 1984 के तहत किया गया था और तब से इसके प्रबंधन का जिम्मा एनसीयूआई के पास है। बहुराज्य सहकारिता समितियां किसी भी वर्ष में अपने शुद्ध लाभ का एक फीसदी हिस्साा सहकारी शिक्षा कोष को देती हैं। इस तरह सालाना 25 करोड़ रुपये एकत्रित होते हैं। सहकारिता

 

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) भारतीय राष् ट्रीय सहकारिता संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने रविवार को कहा कि सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए कोष एकत्रित करने और उसे बनाए रखने का अधिकार सरकार को खत्म नहीं करना चाहिए।

सहकारी शिक्षा कोष का गठन बहुराज्य सहकारिता समिति (एमएससीएस) अधिनियम, 1984 के तहत किया गया था और तब से इसके प्रबंधन का जिम्मा एनसीयूआई के पास है।

बहुराज्य सहकारिता समितियां किसी भी वर्ष में अपने शुद्ध लाभ का एक फीसदी हिस्साा सहकारी शिक्षा कोष को देती हैं। इस तरह सालाना 25 करोड़ रुपये एकत्रित होते हैं।

सहकारिता मंत्रालय ने एमएससीएस कानून 2022 में संशोधनों के प्रस्ताव रखे हैं। इन प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक कोष का नियंत्रण मंत्रालय के पास आ जाए और वह एनसीयूआई या किसी अन्य एजेंसी के जरिए सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण में इस राशि का उपयोग कर सके।

इस प्रस्तावित संशोधन का विरोध करते हुए एनसीयूआई के अध्यक्ष संघानी ने कहा, ‘‘सहकारी शिक्षा कोष का प्रबंधन सरकार के हाथ में होने से यह संकेत जाएगा कि वह ऐसे कोष पर नियंत्रण चाहती है जिसमें उसका कोई योगदान ही नहीं है।’’

संघानी ने एक बयान में कहा कि कोष एनसीयूआई के पास ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के साथ सरकार कोष के संरक्षक की भूमिका में आना चाहती है ताकि कोष की बेहतर निगरानी और प्रशासन हो सके और वे बहुराज्यीय सहकारिता समितियां जो इसमें योगदान नहीं दे रही हैं, वे भी जुर्माने के डर से योगदान दें।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि अब तक इस कोष के उपयोग को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है।’’



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