CAG GASAB: नेचुरल रिसोर्स की नहीं हो पाएगी चोरी, जानिए सरकार क्या कर रही है व्यवस्था


नई दिल्ली: अपने यहां खनिज पदार्थों (Mineral Resourse) के मामले में कुछ राज्य बेहद अमीर हैं। इन राज्यों में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल आदि आते हैं। लेकिन इन राज्यों में इन प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resource) की चोरी भी खूब होती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि राज्य सरकारों को अपने नेचुरल रिसोर्सेज की सही-सही जानकारी ही नहीं है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी के Government Accounting Standards Advisory Board (GASAB) खनिज एवं ऊर्जा (Mineral & Energy) समेत विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार कर रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार न केवल नीतिगत निर्णय ले सकेगी बल्कि इससे ग्रीन जीडीपी के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

नेचुरल रिसोर्स की रूकेगी चोरी
इस समय झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में खनिज पदार्थों की चोरी की अक्सर खबर आती है। राज्य सरकार कहती है कि उन्होंने खदान का पट्टा किसी सरकारी या निजी कंपनी को दिया हुआ है। संबंधित कंपनी कहती है कि उनकी खदानों से चोरी नहीं हो रही है। इसकी वजह यह है कि राज्यों को नेचुरल रिसोर्स की सही सही जानकारी ही नहीं है। अब जो नई लेखांकन प्रणाली का विकास हो रहा है, उससे राज्यों को नेचुरल रिसोर्स की सही जानकारी मिलेगी। साथ ही इससे नेचुरल रिसोर्स के जिम्मेदार उपयोग में मदद मिलेगी। इससे सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

चार प्रमुख नेचुरल रिसोर्स का होगा आंकड़ा
GASAB के चेयरमैन एवं देश के उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के. श्रीनिवासन ने इस नई पहल के बारे में एनबीटी डिजिटल को बताया कि गसब चार प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों…खनिज और ऊर्जा संसाधन, जल संसाधन, भूमि संसाधन और वानिकी एवं वन्य जीव संसाधनों का अकाउंट तैयार कर रहा है। इस पहल का मकसद रिसोर्सेज की उपलब्धता, उनसे मिलने वाले राजस्व की संभावना, संबद्ध लागत और अगली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाना है।

पूरा ब्योरा एक जगह होगा
GASAB की इस पहल से राज्यों में मौजूद रिसोर्सेज के बारे में समूचा ब्योरा एक जगह उपलब्ध होगा। इससे राज्यों को मिलने वाले रॉयल्टी दरों के आकलन के साथ राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही यह संसाधनों के सतत उपयोग तथा भविष्य के राजस्व का सटीक आकलन के साथ अवैध खनन रोकने में भी मददगार होगा। श्रीनिवासन ने बताया कि GASAB ने जुलाई 2020 में Natural Resources Accounts पर एक कंसेप्ट पेपर तैयार किया था। इसमें लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों की परिकल्पना की गयी है। इसका पहला लक्ष्य खनिज और ऊर्जा संसाधनों पर संपत्ति लेखा-जोखा तैयार करना है। सभी 28 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) के लिये 2020-21 का संपत्ति खाता तैयार कर लिया गया है। इसमें 34 प्रमुख खनिजों, 58 लघु खनिजों एवं सभी चार जीवाश्म ईंधनों का पूरा विवरण दिया गया है।

अगले नवंबर तक आ जाएगी रिपोर्ट
श्रीनिवासन ने बताया कि खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के बारे में रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से जारी है और इसके इस साल नवंबर तक आ जाने की उम्मीद है। इसमें 2019-20 से लेकर 2021-22 तक की अवधि को शामिल किया गया है। उनके मुताबिक खनिज और ऊर्जा संसाधनों के बारे में पूरी जानकारी डैशबोर्ड पर भी उपलब्ध होगी। श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘राज्यों में उपलब्ध खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के आंकड़ों से न केवल सरकार सोच-विचार कर नीतिगत निर्णय ले सकेगी बल्कि इससे हरित जीडीपी के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।’’ मध्यम अवधि के लक्ष्य के तहत खनिज और ऊर्जा संसाधनों पर 2022-23 से 2024-25 तक के आंकड़ों के साथ जल, भूमि और वानिकी संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा।

Natural Resources Accounts क्यों है जरूरी
भारत ने 25 सितंबर, 2016 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव ‘सतत विकास एजेंडा 2030’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की तैयारी जरूरी है। इसे 190 से अधिक देशों ने मंजूरी दी हुई है।



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