Charges on UPI: यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करना जेब पर पड़ेगा भारी! RBI लाने जा रहा ये नया नियम, यहां जाने पूरी डिटेल


नई दिल्लीः अगर आप सामान खरीदने के बाद पेमेंट करने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं तो आपको चार्ज देना पड़ सकता है। आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) यूपीआई के जरिए किए जाने वाले भुगतान पर चार्ज लगा सकता है। इतना ही नहीं डेबिट कार्ड से भुगतान करना भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। दरअसल आरबीआई (RBI) ने पेमेंट सिस्टम चार्जेस पर एक समीक्षा पेपर जारी किया है। इस पेपर में रुपयों के लेनदेन में पारदर्शिता लाने से लेकर पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने तक की बात की गई है। इसमें ऑनलाइन पेमेंट सभी माध्यम जैसे यूपीआई, क्रेडिट (Credit Card) और डेबिट कार्ड (Debit Card) आदि सभी तरह के पेमेंट सिस्टम मौजूद है। आरबीआई की तरफ फंड ट्रांसफर पर लगने वाली लागत को निकालने के लिए इस पर विचार क‍िया जा रहा है। आरबीआई ने चार्ज लगाने को लेकर लोगों से सलाह भी मांगी है। इस पेपर में यह भी सुझाव मांगा गया है कि यूपीआई में चार्ज एक निश्चित रेट पर लिया जाए या पैसे ट्रांसफर करने के हिसाब से लिया जाए। बता दें कि फिलहाल यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

लोग खूब कर रहे यूपीआई का इस्तेमाल
एनपीसीआई (NPCI) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर महीने यूपीआई पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल 600 करोड़ ट्रांजैक्शन सिर्फ बीते जुलाई के महीने में किए गए हैं। इसमें कुल 10.2 लाख रुपये की रकम की लेन देन की गई है। देश में यूपीआई इस्तेमाल करने वालों की दर में करीब 7 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

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डेबिट कार्ड पर भी चार्ज लगाने की तैयारी
डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर भी रिजर्व बैंक शुल्क वसूलने के बारे में विचार कर रहा है। हालांकि आरबीआई ने कहा है कि कोई किसी भी अंतिम फैसले को लेने से पहले सभी के सुझाव को देखा जाएगा।

आप इस तरह दे सकते हैं सुझाव
यूपीआई से भुगतान करने पर चार्ज लिया जाना चाहिए या नहीं इसपर आप आरबीआई को अपने सुझाव दे सकते हैं। आप अपना सुझाव आरबीआई को dpssfeedback@rbi.org.in पर ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं।

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चार्ज वसूलने के लिए आरबीआई का तर्क
रिजर्व बैंक के मुताबिक, इसमें सार्वजनिक रुपये लगे हैं। ऐसे में इसकी कॉस्‍ट निकालना जरूरी है। रिजर्व बैंक ने ये भी साफ क‍िया क‍ि रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट यानी आरटीजीएस में लगाया गया शुल्क कमाई का साधन नहीं है। यूपीआई पर होने वाले खर्च को ल‍िया जाएगा, जिससे यह फैसिलिटी भव‍िष्‍य में बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।



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