Electric Highway: यहां बन रहा देश का पहला ई-हाईवे, सड़क पर फर्राटा भरती गाड़ियां हो जाएंगी चार्ज


नई दिल्ली: देश में इलेक्ट्रिक हाईवे (Electric Highway) बनाया जा रहा है। ये बाकी के आम हाईवे जैसा नहीं होगा। ये उनसे काफी अलग होगा। देश में बन रहे इस हाईवे पर चलते हुए ही गाड़ियां चार्ज हो जाएंगी। इन हाईवेज पर चलते हुए भारी-भरकम ट्रक और बसें चार्ज हो सकेंगे। सरकार सोलर एनर्जी से चलने वाले इलेक्ट्रिक हाईवेज बनाने पर काम कर रही है। इस हाईवे (Electric highway in India) पर लोगों को कई सुविधाएं मिलेंगी। अगर कोई दुर्घटना हो जाए तो 30 मिनट के अंदर ही लोगों तक मदद पहुंच जाएगी। ये हाईवे कैसा होगा और इसपर किस तरह की सुविधाएं मिलेंगी, आईए आपको बताते हैं।

इलेक्ट्रिक हाईवे का शुरू हो चुका है ट्रॉयल
नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिक वीइकल्स ने इस साल वर्ल्ड ईवी डे 2022 (World EV Day 2022) के मौके पर दिल्ली से जयपुर ई-हाईवे (Electric Highway) के दूसरे और अंतिम फेज के ट्रायल रन की शुरुआत की गई है। इस 278 किलोमीटर के हाईवे (Electric Highway) पर इलेक्ट्रिक बस और कार को महीने भर के लिए लगे चार्जर और तकनीक के साथ ट्रायल किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, दिल्ली से आगरा के पिछले 210 किलोमीटर के तकनीकी ट्रायल के बाद इस 278 किलोमीटर के इस कॉमर्शियल ट्रायल से देश के पहले 500 किलोमीटर के इलेक्ट्रिक हाइवे बनने का रास्ता साफ जो जाएगा।

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चार राज्यों से गुजरेगा हाईवे
नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिकल वीइकल्स (NHEV) पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 500 किलोमीटर के देश के पहले इलेक्ट्रिक हाईवे का 210 किलोमीटर का पहला चरण दिल्ली से आगरा तक साल 2020-2021 में पूरा किया गया था। इसके (Electric Highway) ट्रायल रन की शुरुआत भी दिल्ली के इंडिया गेट से हुई थी। 500 किलोमीटर का यह इलेक्ट्रिक हाइवे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से गुजरेगा। इस हाईवे पर 20 चार्जिंग स्टेशन और 10 इन्फ्रा डिपो बनाए जाने हैं। इस ट्रायल में जहां इनके लिए प्रस्तावित जगहों पर सहमति के लिए वाहनों की रेंज और तकनीकी आकड़ों का इस्तेमाल होगा।

साल 2016 से हुई थी इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की शुरुआत
भारत में इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने की योजना 2016 में ही शुरू हो गई थी। भारत ने दुनिया के सबसे लंबे इलेक्ट्रिक हाईवे (Electric Highway) के निर्माण के लिए अटल हरित विद्युत राष्ट्रीय महामार्ग यानी AHVRM नामक योजना शुरू की है। तब ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा था कि जल्द ही भारत में भी स्वीडन की तरह इलेक्ट्रिक हाईवे होंगे। इसके तहत सबसे पहले दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे और दिल्ली-आगरा यमुना एक्सप्रेसवे को इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने का प्रोजेक्ट चल रहा है।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर हो चुका है ट्रायल
यमुना एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक हाईवे का ट्रायल दिसंबर साल 2020 में हो चुका है। वहीं दिल्ली-जयपुर हाईवे को इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने के लिए ट्रायल 9 सितंबर 2022 को शुरू हो चुका है, जो एक महीने तक चलेगा। दिल्ली-जयपुर हाईवे और दिल्ली-आगरा यमुना एक्सप्रेसवे को मिलाकर करीब 500 किलोमीटर इलेक्ट्रिक हाईवे के मार्च 2023 तक शुरू हो जाने की उम्मीद है। ये देश का पहला और दुनिया का सबसे लंबा इलेक्ट्रिक हाईवे (Electric Highway) होगा। अभी दुनिया में सबसे लंबा इलेक्ट्रिक हाईवे बर्लिन में है, जिसकी लंबाई 109 किलोमीटर है।

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ई-हाईवे बनाने पर कितना खर्च
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सरकार इस इलेक्ट्रिक हाईवे (Electric Highway) को बनाने पर 2.5 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार तेजी से बढ़ेगा। इलेक्ट्रिक हाईवेज सरकार की देश में 26 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण की योजना का हिस्सा हैं। सरकार का प्लान ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तहत देश भर के हाईवे के किनारे करीब 3 करोड़ पेड़ लगाने का भी है।

जर्मनी की कंपनी की मदद से बनाया जा रहा हाईवे
भारत सरकार ने इस ई हाईवे (Electric Highway) को बनाने के लिए जर्मनी की एक कंपनी से समझौता किया है। इस कंपनी ने इससे पहले जर्मनी की फ्रैंकफर्ट शहर में साल 2019 में ही ई-सड़क बनाई है। छह मील लंबी इस सड़क के ऊपर बिजली के केबल लगे हुए हैं। जिसमें 670 वोल्ट का कंरट दौड़ता है। इसके नीचे चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन केबल की मदद से ही अपनी ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

हाई स्पीड में फर्राटा भरेंगे वाहन
इलेक्ट्रिक हाईवे पर वाहन हाई स्पीड पर चल सकेंगे। इस हाईवे (Electric Highway) पर वाहनों के लिए अधिकतम स्पीड 120 किमी प्रति घंटे की रहेगी। इससे प्रदूषण में भी कमी आएगी। वहीं लोग कम खर्च में सफर कर सकेंगे।



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