Explainer : 10 साल में 6 पायदान की छलांग लगा ब्रिटेन से आगे पहुंची इकॉनमी, देखें साल-दर-साल का हिसाब


नई दिल्ली : भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है। अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी के बाद भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जिस ब्रिटेन का कभी भारत गुलाम रहा, उसे पीछे छोड़ हम इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर आए हैं। बीते 10 वर्षों में भारतीय इकोनॉमी ने 11वें पायदान से यहां तक का सफर तय किया है। भारत लंबे समय से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। जिस समय दुनिया भर में मंदी की आशंका है और अर्थव्यवस्थाओं का आकार सिकुड़ रहा है, उस समय में भी हमारी ग्रोथ रेट दोहरे अंकों में रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) 13.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। भारत के लिए पिछले 10 वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। इस दौरान कारोबारी जगत में कई सुधारों को लागू किया गया, जिसने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया। साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भी काफी काम हुआ है। इस आलेख में हम पिछले 10 वर्षों में भारत की जीडीपी में आई ग्रोथ को आंकड़ों से जानेंगे।

क्या होती है जीडीपी?
भारत जीडीपी (GDP) के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। लेकिन यह जीडीपी होती क्या है? आइए जानते हैं। जीडीपी की फुल फॉर्म है- ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट। हिंदी में हम कहेंगे- सकल घरेलू उत्पाद। किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल बाजार मूल्य ही जीडीपी कहलाता है। भारत में यह अवधि वित्त वर्ष है, जो अप्रैल से मार्च के बीच का समय है। तिमाही आधार पर भी जीडीपी की गणना होती है। जीडीपी से ही किसी देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति का पता लगाया जाता है। यह किसी स्टूडेंट की मार्कशीट की तरह ही है। मार्कशीट बताती है कि स्टूडेंट ने साल भर में कैसा परफॉर्म किया और किस विषय में कितने नंबर आए। उसी तरह जीडीपी से देश में आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है। अगर जीडीपी डेटा सुस्त रहता है, तो इससे पता चलता है कि देश में पिछले साल के मुकाबले कम वस्तुओं का उत्पादन हुआ और सर्विस सेक्टर में भी गिरावट आई।

कैसी रही 10 वर्षों में हमारी ग्रोथ रेट?

किसी भी वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ रेट बताती है कि उस साल देश की अर्थव्यवस्था कैसी रही। उसमें बढ़ोतरी हुई या सुस्ती आई। आइए पिछले 10 साल में जीडीपी की ग्रोथ रेट के बारे में जानते हैं। साल 2012-13 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 5.46 फीसदी रही थी। इसके बाद यह 2013-14 में 6.39 फीसदी, 2014-15 में 7.41 फीसदी, 2015-16 में 8.0 फीसदी, 2016-17 में 8.26 फीसदी, 2017-18 में 6.80 फीसदी, 2018-19 में 6.5 फीसदी, 2019-20 में 3.74 फीसदी, 2020-21 में -6.60 फीसदी और 2021-22 में 8.95 फीसदी रही। वित्त वर्ष 2020-21 में कोरोना महामारी के प्रकोप और लॉकडाउन के चलते जीडीपी ग्रोथ रेट नकारात्मक रही थी।

वर्षग्रोथ रेट
2012-135.46 फीसदी
2013-146.39 फीसदी
2014-157.41 फीसदी
2015-168.0 फीसदी
2016-178.26 फीसदी
2017-186.80 फीसदी
2018-196.5 फीसदी
2019-203.74 फीसदी
2020-21-6.60 फीसदी
2021-228.95 फीसदी

आंकड़ों से जानें देश की जीडीपी का आकार
अगर पिछले 10 वर्षों में भारत की जीडीपी (India GDP) के आंकड़े देखें, तो कोरोना काल को छोड़कर इसमें अच्छी बढ़ोतरी हुई है। साल 2012-13 में देश की जीडीपी 1827.64 अरब डॉलर थी। यह साल 2013-14 में 1856.72 अरब डॉलर, 2014-15 में 2039.13 अरब डॉलर, 2015-16 में 2103.59 अरब डॉलर, 2016-17 में 2294.80 अरब डॉलर, 2017-18 में 2651.47 अरब डॉलर, 2018-19 में 2702.93 अरब डॉलर, 2019-20 में 2831.55 अरब डॉलर, 2020-21 में 2667.69 अरब डॉलर और 2021-22 में 3173.40 अरब डॉलर हो गई।

वर्षजीडीपी
2012-131827.64 अरब डॉलर
2013-141856.72 अरब डॉलर
2014-152039.13 अरब डॉलर
2015-162103.59 अरब डॉलर
2016-172294.80 अरब डॉलर
2017-182651.47 अरब डॉलर
2018-192702.93 अरब डॉलर
2019-202831.55 अरब डॉलर
2020-212667.69 अरब डॉलर
2021-223173.40 अरब डॉलर

GDP Growth News: देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर गुड न्‍यूज, पहली तिमाही में 13.5% की धुआंधार जीडीपी ग्रोथ
ये हैं पहली तिमाही के आंकड़े

हाल ही में सरकार द्वारा जारी आंकडों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी के 36.85 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 32.46 लाख करोड़ रुपये था। पिछले कुछ वर्षों की पहली तिमाही में जीडीपी के आंकडें देखें, तो इसमें अच्छी ग्रोथ हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में जीडीपी 33.84 लाख करोड़ रुपये रही थी। 2019-20 की पहली तिमाही में यह 35.49 लाख करोड़ रुपये रही। हालांकि, कोविड लॉकडाउन के कारण साल 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी सिकुड़कर 27.04 लाख करोड़ रुपये रह गई थी।



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