Free ration scheme: महंगाई डायन से गरीबों को राहत देने की तैयारी, 80 करोड़ लोगों को होगा फायदा


नई दिल्ली: महंगाई की मार झेल आम लोगों के लिए अच्छी खबर है। सरकार मुफ्त राशन योजना को तीन से छह महीने के लिए आगे बढ़ा सकती है। कोरोना महामारी (Covid-19 pandemic) के दौरान गरीबों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) को अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया था। इस साल मार्च में इसे छह महीने के लिए बढ़ाया गया था। इसकी डेडलाइन 30 सितंबर तक है। लेकिन देश में महंगाई अभी उच्च स्तर पर बनी हुई है। साथ ही जियोपॉलिटिकल कारणों और चीन में सुस्ती के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। यही वजह है कि सरकार फ्री राशन स्कीम को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे देश के 80 करोड़ लोगों को फायदा होगा। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि दुनिया अभी महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के असर से नहीं निकल पाई है। इसलिए गरीबों को राहत देने के लिए फ्री राशन योजना को तीन से छह महीने तक और आगे बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना दुनिया का सबसे बड़ा फूड सिक्योरिटी प्रोग्राम है। इसके लिए सरकार के पास अनाज का पर्याप्त भंडार है। अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने हाल में स्टॉक पोजीशन की समीक्षा की थी। सरकार फ्री राशन स्कीम को सितंबर से आगे बढ़ाने की स्थिति में है।

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कितना मिलता है राशन
इस योजना के तहत परिवार के हरेक सदस्य को हर महीने पांच किलो राशन दिया जाता है। यह नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत मिलने वाले कोटे से अलग है। इस कानून के तहत ग्रामीण इलाकों में 75 फीसदी और शहरी इलाकों में 50 फीसदी आबादी को सस्ता राशन दिया जाता है। एक अधिकारी ने दावा किया कि कोरोना काल के मुश्किल दौर में इस योजना ने इकॉनमी की काफी मदद की है। देश में महंगाई अप्रैल में 7.8 फीसदी पर पहुंच गई थी। हालांकि जुलाई में इसमें कुछ कमी आई है। जुलाई में यह 6.71 फीसदी रही। हालांकि यह अब भी आरबीआई के दायरे से ऊपर बनी हुई है। आरबीआई ने इसे छह फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है।

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एक अधिकारी ने कहा कि गरीबों की मदद के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। अगर इस योजना को एक तिमाही के लिए आगे बढ़ाया जाता है तो सरकार को इसके लिए 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। अब तक इस योजना पर 3.40 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जानकारों का कहना है कि जून से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है और महंगाई की दर भी सात फीसदी से नीचे आ गई है। लेकिन चीन में सुस्ती और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लोबल इकॉनमी प्रभावित हो सकती है।



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