Home Loan EMI: होम लोन ईएमआई के भुगतान में हो रही है देरी, जानिए क्या हो सकता है


Bankbazaar.com के सीईओ आदिल शेट्टी का कहना है कि होम लोन लेना बहुत आसान नज़र आ सकता है, लेकिन समय पर उसकी रिपेमेंट (Home Loan Repayment) हो, इसके लिए सावधानी से फाइनेंसियल प्लानिंग (Financial Planning) करने की ज़रूरत होती है। होम लोन ईएमआई (Loan EMI) का देरी से भुगतान करने पर उधार लेने वाले कई तरह से प्रभावित हो सकते हैं। यहां हम होम लोन की रिपेमेंट (Home Loan Repayment) में देरी के नतीज़ों और समाधानों की चर्चा कर रहे हैं।

छोटी गलती बनाम बड़ी गलती

यदि आप तीन लगातार महीनों तक अपनी ईएमआई की भुगतान करने में देरी करते हैं, तो इसे छोटी गलती माना जाता है। इस मामले में, उधारदाता, आपको भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजना शुरू कर सकता है। लेकिन समस्या की शुरूआत तब होती है जब यह देरी और भी अधिक बढ़ जाती है। ईएमआई चुकाने में तीन महीने से अधिक की देरी को बड़ी गलती मानी जाती है। ऐसी हालत में उधारदाता सरफेसी कानून, 2002 के तहत बकाया राशि की रिकवरी के लिए सम्पत्ति की नीलामी की प्रक्रिया को शुरू कर सकता है।

ईएमआई भुगतान में देरी पर क्या होगा

ईएमआई में देरी करने पर, पहला कदम, जो आमतौर पर उधारदाता उठाता है, वह बकाया ईएमआई पर 1% से 2% के आसपास प्रति महीने पेनल्टी लगाना होता है। और इसके साथ न्यूनतम प्रिस्क्राइब राशि का भी प्रावधान होता है। बड़ी गलती करने पर, बैंक आपके लोन को एनपीए घोषित कर सकता है और बाद में रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। आमतौर पर किसी लोन को एनपीए घोषित करने से पहले बैंक नोटिस भेजता है।

थर्ड पार्टी का भी हो सकता है इस्तेमाल

कभी-कभी बैंक एनपीए घोषित हो चुके अकाउंट्स से अपने पैसे को रिकवर करने के लिए थर्ड पार्टी एजेन्टों का इस्तेमाल करते हैं। इस कारण उधारकर्ताओं को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यह कहने के बाद, यह उधारदाता और उधारकर्ता के दोनों के हित में होता है कि वे बकाया राशि की रिपेमेंट का तरीका खोज लें। साथ ही, उधारकर्ता, यहां तक कि उसने गलती ही क्यों न की हो, उसके साथ सम्मानीय व्यवहार किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या धमकी आदि से उधारदाता को नुकसान उठाना पड़ सकता है। एनपीए की वजह से उधारदाता के साथ उधारकर्ता के संबंध लगातार प्रभावित हो सकते हैं। यदि उधारकर्ता ने, उधारदाता से कोई अन्य लोन लिया है, तो उस लोन को भी एनपीए माना जा सकता है, फिर चाहे उनके लिए समय पर ईएमआई का भुगतान ही क्यों न किया जा रहा हो।

क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव

होम लोन ईएमआई के अनियमित रिपमेंट से क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। यदि उधारकर्ता अक्सर ईएमआई के भुगतान में चूक करता है, तो इसकी वजह से उसका क्रेडिट स्कोर बहुत ही कम हो सकता है। वर्तमान समय में, अधिकांश बैंक नियमित इंटरवल पर अपनी लोन ब्याज दर को रिसेट करते हैं जिसमें वे जारी रेपो रेट और उधारकर्ता के क्रेडिट स्कोर के आधार पर गणना किए गए जोखिम प्रीमियम के आधार पर लागू ब्याज दर को फिर से तय करते हैं। इसलिए, निम्न क्रेडिट स्कोर के कारण अनुशासनहीन उधारकर्ताओं के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। बड़ी गलती करने पर, बैंक इस प्रकार के अकाउंट की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देते हैं और एनपीए को उधारकर्ता की क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाया जाता है। इससे उधारकर्ता की साख पर बहुत बड़ी चोट लग सकती है और उनकी भविष्य में उधार लेने की क्षमता में भी कमी हो सकती है।

ट्रांसफर और नए लोन को अस्वीकार करना

एक बार आपका होम लोन अकाउंट एनपीए घोषित हो जाए तो आगे काफी दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में यदि आप अपने होम लोन को किसी अन्य बैंक या फाइनेंसियल इंस्टीच्यूशन को ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो नया उधारदाता खराब रिपेमेंट इतिहास के आधार पर आपके आवेदन को अस्वीकार कर सकता है। इस प्रकार के उधारकर्ताओं के लिए अन्य केटेगरी जैसे पर्सनल लोन, कार लोन आदि को लेने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति से किस प्रकार से बचा जाए?

यदि आपको अस्थाई रूप से लिक्विडिटी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो आप अपने मित्रों या रिश्तेदारों से उधार लेकर ईएमआई का भुगतान कर सकते हैं। दूसरा विकल्प, आप अपनी एफडी या जीवन बीमा पॉलिसी के बदले में ओडी (ओवरड्राफ्ट) ले सकते हैं, और लोन ईएमआई का भुगतान कर सकते हैं। लेकिन, जब आपकी लिक्विडिटी की स्थिति सुधर कर सामान्य हो जाती है, तो आपको पैसे को ओडी में जमा ज़रूर करवाना चाहिए और अपने मित्र/रिश्तेदार को पैसा वापस ज़रूर करना चाहिए।

एफडी ​लिक्विडेट करें

लेकिन यदि आप अनिश्चित लिक्विडिटी सेटबैक का सामना कर रहे हैं, तो आप अपने कुछ कम ब्याज वाले निवेश जैसे एफडी या लिक्विड फंड्स को लिक्विडेट कर सकते हैं ताकि समय पर ईएमआई की रिपेमेंट कर सकें। आप अपने पीएफ अंशदान को कम कर सकते हैं या फिर दीर्घकालिक निवेश जैसे पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) से पैसा निकलवा सकते हैं, ताकि होम लोन में चूक करने से बचने के लिए फंड्स की व्यवस्था कर सकें।

गंभीर आ​र्थिक संकट हो तो क्या करें

यदि आपके समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया हो, वित्तीय रिकवरी असंभव नज़र आती है, तो आप गंभीर वित्तीय कार्रवाई करने पर विचार कर सकते हैं। जैसे अपने घर को बेचना और छोटे घर में शिफ्ट होना। या फिर किराए पर घर लेना ताकि आप कुछ पैसा बचा सकें। या अपने चल सम्पत्ति जैसे सोना, कार आदि को बेचने पर विचार कर सकते हैं ताकि लोन रिपेमेंट में चूक करने से बच सकें। साथ ही, अल्पावधि में अपनी ईएमआई को कवर करने के लिए आप लोन बीमा प्लान भी ले सकते हैं। कुछ बैंक और वित्तीय संस्थान इन लोन बीमा प्लान्स को लोन के डिस्बर्सल के समय ऑफर करते हैं। नौकरी चले जाने या आप की अस्थाई हानि के समय, जब आप अपनी ईएमआई का भुगतान करने में समर्थ नहीं होते हैं, तो उस स्थिति में ये प्लान सहायक साबित हो सकते हैं।

इमर्जेंसी फंड बना कर रखें

विपरीत वित्तीय स्थितियों में लोन ईएमआई के समय पर भुगतान के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी को तय करने के उद्देश्य से पर्याप्त इमर्जेंसी फंड्स बना कर रखें। लोन लेने से पहले प्लानिंग करने से आपको ईएमआई से चूक करने की रोकथाम करने में मदद मिलती है। आप अपनी रिपेमेंट क्षमता के अनुसार लोन लेने पर फोकस कर सकते हैं, आप ईएमआई को कम रखने के लिए लंबी अवधि के लिए लोन ले सकते हैं, तथा ईएमआई के चालू होने से पहले खुद को वित्तीय रूप से तैयार करने के लिए ईएमआई भुगतान की शुरूआत करने से पहले मोरेटोरियम अवधि की सुविधा भी प्राप्त कर सकते हैं।

उधार देने वाले के संपर्क में रहें

इस बात की भी सलाह दी जाती है कि आप अपने उधारदाता के संपर्क में रहें। उनसे मिल कर या सलाह मशविरे से कोई समाधान खोजें। आपके मामले पर निर्भर करते हुए, उधारदाता आपको लोन रिस्ट्रक्चरिंग, छूट या मोरेटोरियम अवधि और लोन के निपटान जैसे विकल्प ऑफर कर सकता है जहां पर आपके भार को कम करने के लिए ब्याज दर को नियमों के अनुसार कम कर दिया जाता है।



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