Income Tax Return : आईटीआर फाइल करते समय जरूर ध्यान रखें ये 9 बातें, नहीं होगी बाद में परेशानी


नई दिल्ली : इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की आखिरी तारीख अब बिल्कुल पास आ गई है। 31 जुलाई आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख (ITR Filing Last Date) है। सरकार का कहना है कि उसकी इस समयसीमा को आगे बढ़ाने (ITR Deadline Extension) की कोई मंशा नहीं है। ऐसे में अब आपके पास आईटीआर भरने के लिए काफी कम समय बचा है। अगर आप पेनल्टी और आयकर विभाग के नोटिस से बचना चाहते हैं, तो समय पर अपना आयकर रिटर्न जरूर भर दें। 31 जुलाई के बाद आईटीआर फाइल करने पर 5,000 रुपये की लेट फाइलिंग फीस ली जाती है। यह लेट फाइलिंग फीस धारा 234F के तहत ली जाती है। छोटे करदाता जिनकी कर योग्य आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है, उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगता है। अगर आप आईटीआर भरने जा रहे हैं, तो आपको 9 बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि ये क्या हैं।

1. डाउनलोड करें फॉर्म-16 या 16ए

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आपको सबसे पहले फॉर्म-16 की जरूरत होगी। कर्मचारी अपने नियोक्ता से बात करें और फॉर्म-16 प्राप्त कर लें। फॉर्म-16 में आपकी सैलरी पर लगे टैक्स के बारे में भी सारी सूचना होती है। इतना ही नहीं, उसमें आपकी सैलरी का ब्रेकअप भी होता है। अगर फॉर्म-16 में एचआरए ना हो तो आप उसे आईटीआर फाइल करते वक्त भी दे सकते हैं। हालांकि, यह सारी जानकारी अगर आपने अपने नियोक्ता को दे दी थी, तो फॉर्म-16 देखकर आप चुटकी में आईटीआर फाइल कर सकते हैं।

2. चेक करें टीडीएस और टीसीएस की जानकारी

आयकर रिटर्न फाइल करने से पहले 26एएस फॉर्म जरूर चेक कर लें। इस फॉर्म में आपके टैक्स की जानकारी होती है। चेक करें कि फॉर्म में जो टैक्स डिटेल दी हैं, वह सही हैं या नहीं। अगर आपको लगता है कि कोई जानकारी सही नहीं है तो आप उसे सही करवा सकते हैं। हालांकि, किसी भी जानकारी को सही करवाने में 7-10 दिन तक का समय लग सकता है। ऐसे में आईटीआर फाइल करने से 15-20 दिन पहले ही 26एएस फॉर्म चेक कर लेना चाहिए।

3. एआईएस फॉर्म में इनकम और टीडीएस-टीसीएस डिटेल्स चेक करें

फॉर्म 26एएस चेक कर लेने के बाद आपको एआईएस (एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट) फॉर्म के साथ इसका मिलान जरूर करना चाहिए। एआईएस फॉर्म में यह सारी जानकारी होती है कि आपने साल भर में कौन-कौन सी ट्रांजेक्शन की हैं। इसमें ये दिया होता है कि आपको सैलरी, रेंट, ब्याज आदि से कहां-कहां से कितनी इनकम हुई है और आपने इस बीच क्या-क्या बेचा है। अगर आपको लगे कि कोई ट्रांजेक्शन छूट गई है तो उसे आईटीआर फाइल करते वक्त जरूर बता दें। आईटीआर भरते वक्त यह जरूरी होता है कि आप बिल्कुल सही जानकारी दें।

4. क्रिप्टो से कमाई
आयकर रिटर्न भरते समय आपको क्रिप्टो असेट्स से होने वाली कमाई की घोषणा भी करनी होगी। क्रिप्टो पर इस साल के बजट में 30 फीसदी टैक्स लगाने की घोषणा हो गई है। ऐसे में अभी आईटीआर फाइल करते समय ये टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन जानकार मानते हैं कि इस बार भी 30 फीसदी टैक्स देकर खुद को सुरक्षित करना बेहतर है। तो अगर आपने भी क्रिप्टो में पैसा लगाया है, तो उसकी घोषणा जरूर करें और टैक्स भी भरें।

5. जमा पर मिला ब्याज

अधिकांश करदाता अपनी अन्य स्रोतों से हुई आय को रिपोर्ट नहीं करते हैं। इसमें ब्याज से हुई आय भी शामिल होती है। ध्यान रहे कि आपको बैंक डिपॉजिट या किसी अन्य योजना में डिपॉजिट से जो आय मिलती है, उसे आपको आईटीआर फाइल करते वक्त बताना जरूरी होता है। अगर आपको कोई कन्फ्यूजन हो तो आप एआईएस फॉर्म भी देख सकते हैं, उसमें इसकी जानकारी मिल जाएगी। उस फॉर्म में आपके पैन से जुड़ी हर ट्रांजेक्शन का पूरा रेकॉर्ड होता है।

6. कैपिटल गेन स्टेटमेंट फॉर्म हासिल करें
अगर आपने स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड में निवेश किया है तो आपको कैपिटल गेन स्टेटमेंट भी हासिल कर लेना जरूरी है। एक लाख रुपये से अधिक के लॉन्ग टर्म गेन पर 10 फीसदी टैक्स लगता है। वहीं दूसरी ओर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी टैक्स लगता है। इस टैक्स की कैल्कुलेशन काफी कठिन होती है, इसलिए खुद ब्रोकरेज फर्म की तरफ से ही आपके लिए टैक्स कैल्कुलेशन की जाती है। आप अपने ब्रोकर से कैपिटल गेन स्टेटमेंट हासिल कर सकते हैं और फिर आईटीआर फाइल कर सकते हैं।

7. विदेशी एसेट्स की भी दें जानकारी

आईटीआर भरते समय आपको यह भी बताना होगा कि विदेशों में आपकी संपत्ति कहां-कहां है। साथ ही अगर आपको किसी विदेशी संपत्ति से कोई आय हुई है, तो उसकी जानकारी भी आयकर विभाग को देनी होगी। ऐसे में जरूरी है कि ये सारी जानकारी आप पहले से हासिल कर लें और आईटीआर फाइल करते वक्त उसमें इसे जरूर दिखाएं। अगर विदेश में किसी बैंक में आपने पैसे रखे हैं तो उसके बारे में भी बताना जरूरी है।

8. फाइनल फॉर्म में चेक करें डिडक्शन और छूट

जब आप आईटीआर फॉर्म में सारी जानकारी भर लें तो उसे एक बार चेक जरूर करें। जल्दबाजी में टैक्स रिटर्न फाइल ना करें। अब आयकर रिटर्न फॉर्म पहले की तुलना में बहुत आसान हो गए हैं और उनमें बहुत सारी जानकारी पहले से ही भरी रहती हैं। हालांकि, कई ऐसी जानकारियां होती हैं तो फॉर्म में नहीं होतीं और उन्हें चेक करना भी आसान नहीं होता। ऐसे में आप किसी टैक्स एक्सपर्ट की भी मदद ले सकते हैं। आज के समय में बहुत सारे टैक्स पोर्टल भी हैं, जो मामूली फीस के बदले मदद मुहैया कराते हैं।

9. टैक्स रिटर्न को वेरिफाई करें

केवल इनकम टैक्स रिटर्न भरना ही पर्याप्त नहीं है। आईटीआर भरने के बाद इसका वेरिफिकेशन कराना भी जरूरी है। किसी भी टैक्सपेयर की ITR फाइल करने की प्रॉसेस तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक कि वह अपने भरे हुए ITR का वेरिफिकेशन न करा ले। कोई भी व्यक्ति 6 तरीकों की मदद से ITR को वेरिफाई करा सकता है।

1. इनकम टैक्स रिटर्न को आधार ओटीपी के जरिए आसानी से वेरिफाई कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपका आधार-पैन लिंक होना जरूरी है।

2. आप चाहें तो अपने नेटबैंकिंग अकाउंट में लॉगिन कर के भी टैक्स रिटर्न वेरिफाई कर सकते हैं।

3. अपने बैंक अकाउंट से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड यानी ईवीसी जनरेट कर के भी आप रिटर्न वेरिफाई कर सकते हैं।

4. आईटीआर रिटर्न वेरिफाई करने के लिए आप डीमैट अकाउंट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

5. बैंक एटीएम के जरिए भी रिटर्न वेरिफाई करने की सुविधा मिलती है।

6. करदाता आईटीआर-वी फॉर्म की कॉपी साइन करके बेंगलुरु के इनकम टैक्स के ऑफिस में भेज सकते हैं।



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