Instant loan apps: मिनटों में लोन लेने के चक्कर में तबाह हो सकती है जिंदगी, दिल्ली पुलिस ने किया चीनी लोन एप्स रैकेट का भंडाफोड़


नई दिल्ली: बीते कुछ साल में इंस्टेंट लोन देने वाले कई एप (instant loan app) सक्रिय हो गए हैं। इन्हें चाइनीज लोन एप (Chinese Loan apps) भी कहा जाता है। ये लोग बिना किसी दस्तावेज के लोन देने की अक्सर नई-नई स्कीम लेकर आते हैं और फिर ग्राहकों को परेशान करते हैं। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ये लोग यूजर्स का डेटा चीन और हॉन्गकॉन्ग में स्थित सर्वर्स को भेजते थे। इसमें चीन के कुछ नागरिकों के शामिल होने की बात भी सामने आई है। पैसों को क्रिप्टोकरेंसीज के जरिए चीन भेजा जाता था। ग्राहकों की प्राइवेसी के साथ छेड़छाड़ की जाती थी। अब तक की जांच के मुताबिक चीनी नागरिक 500 करोड़ रुपये का गबन कर चुके हैं।

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस (IFSO) ने दो महीने तक दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार में चले ऑपरेशन के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि उसे इस बारे में एनसीआरपी पर सैकड़ों शिकायतें मिली थीं। इनमें कहा गया था कि इंस्टेंट लोन एप ऊंचे रेट पर लोन दे रहे हैं और पेमेंट के बाद भी पैसे की वसूली कर रहे हैं। इसके लिए वे ग्राहकों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और ब्लैकमेल करके पैसे ऐंठ रहे हैं।

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100 से ज्यादा एप शामिल
IFSO को पड़ताल में पता चला कि लोन और फिरौती वसूलने के इस रैकेट में 100 से ज्यादा एप शामिल हैं। टेक्निकल एनालिसिस में सामने आया कि ये एप ग्राहकों की डिटेल को चीन और हॉन्ग कॉन्ग स्थित सर्वर्स को भेज रहे थे। हवाला और क्रिप्टोकरेंसीज के जरिए पैसों को चीन भेजा जा रहा था। लोन देने वाले एप की आड़ में ये एप डेवलप किए गए हैं। ये संदिग्ध एप हैं और यूजर से परमिशन लेते हैं। ये एप गूगल प्ले स्टोर और बेवसाइट्स पर उपलब्ध हैं। गूगल के सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के जरिए भी इनकी मार्केटिंग की जा रही थी।

तुरंत लोन मांगने चाहते वाले ग्राहक इन एप्स को डाउनलोड करते हैं और केवाईसी के बाद एप को अपनी डिटेल यूज करने की परमिशन दे देते हैं। कुछ ही मिनटों में यूजर के अकाउंट में पैसा आ जाता है। इसके बाद एप यूजर की डिटेल चीन भेजना शुरू कर देता है। कस्टमर्स का डेटा कई मॉड्यूल्स के साथ साझा किया जाता है। इसके बाद कस्टमर से पैसे ऐंठने का खेल शुरू होता है। उसे कई नंबरों से कॉल किया जाता है। ये नंबर फर्जी आईडी से हासिल किए जाते हैं। यूजर की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके उसे ज्यादा पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है। ये रिकवरी एजेंट्स एक ऐेसे कॉल सेंटर से काम करते हैं जिसे चीन के सर्वर से यूजर्स की सारी डिटेल मिलती है।

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चीनी नागरिक शामिल
सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से यूजर पैसा देना शुरू कर देता है। उसे ऐसे बैंक अकाउंट्स में पैसा जमा करने को कहा जाता है जो फर्जी होते हैं या धोखे से हासिल किए गए होते हैं। इन पैसों को फिर खास बैंक अकाउंट्स में डाइवर्ट किया जाता है और फिर हवाला या क्रिप्टोकरेंसीज के जरिए चीन भेज दिया जाता है। देखने में आया है कि पांच से 10 हजार रुपये का मामूली लोन लेने वाले ग्राहकों को लाखों रुपये देने के लिए मजबूर किया गया। इन एप्स के झांसे में फंसे कई लोगों ने तो आत्महत्या भी कर ली। पैसे ऐंठने के लिए कई अकाउंट्स बनाए गए थे। हर अकाउंट में रोजाना एक करोड़ रुपये तक जमा होते थे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए IFSO ने ऐसे एप्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। कई टीमें बनाई गईं। एप्लिकेशन कोड, कॉल डिटेल और फाइनेंशियल ट्रेल का गहराई से एनालिसिस किया गया। इसमें सामने आया कि इसका नेटवर्क दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और देश के कई दूसरे हिस्सों में फैला है। दो महीने तक चले अभियान में कई जगह छापे मारे गए और देश के विभिन्न हिस्सों से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही उनसे नौ लैपटॉप, 25 हार्ड डिस्क, 51 मोबाइल और 19 डेबिट कार्ड, तीन कारें और चार लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

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500 करोड़ की हेराफेरी
गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ पूछताछ में पता चला कि वे चीनी नागरिकों के इशारे पर काम कर रहे थे। सारा डेटा चीन में मौजूदा सर्वर्स के जरिए दिया जा रहा था। एप्स के एनालिसिस से पता चला कि इस तरह के एप्स को चीन में विकसित किया जा रहा है। मामले में शामिल चीनी नागरिकों की पहचान हो गई है और उनका पता लगाने और गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। फाइनेंशियल ट्रेल और दूसरे टेक्निकल एनालिसिस से यह बात सामने आई है कि इस मामले में चीन के नागरिकों की सक्रिय भूमिका थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद वे अपने रिकवरी कॉल सेंटर्स को पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश शिफ्ट कर रहे हैं। अब तक की जांच के मुताबिक चीनी नागरिक 500 करोड़ रुपये का गबन कर चुके हैं। मामले की जांच जारी है।



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