Milk Price Rates: दिल्ली और मुंबई से 14 रुपये तक सस्ता दूध, BJP सरकार वाले इस राज्य ने जानिए किया है क्या जुगाड़


नई दिल्‍ली: अमूल (Amul) और मदर डेयरी (Mother Dairy) ने हाल में अपने दूध के दाम बढ़ाए हैं। दूध की बिक्री करने वाली इन दोनों दिग्‍गज कंपनियों ने कीमतों में 2 रुपये का इजाफा किया है। इसके बाद दिल्‍ली-एनसीआर, मुंबई और कोलकाता सहित कई बड़े और छोटे शहरों में इनका दूध महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद टोन्‍ड दूध 52 रुपये और फुल क्रीम 62 रुपये प्रति लीटर मिलने लगा है। इसके उलट बेंगलुरु में तस्‍वीर बिल्‍कुल उलट है। यहां टोन्‍ड दूध सिर्फ 38 रुपये और फुल क्रीम दूध 46 रुपये लीटर में मिल रहा है। आखिर बेंगलुरु और दूसरे शहरों में दूध की कीमत में इतना फर्क कैसे है? बीजेपी शासित कर्नाटक ने ऐसी क्‍या जुगाड़ बनाई जो दूसरे राज्‍यों के पास नहीं है? आइए, यहां समझने की कोशिश करते हैं।

हाल में खाने-पीने की तमाम चीजों के दाम बढ़े हैं। इनमें आटा, मैदा, तेल, चावल शामिल हैं। 16 अगस्‍त को लोगों को महंगाई का एक और झटका तब लगा जब अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम 2 रुपये बढ़ाने का एलान किया। इन दोनों का देश के बड़े क्षेत्र में प्रभाव है। हालांकि, इसकी आंच बेंगलुरु में नहीं आई। यहां मुख्‍य रूप से नंदिनी ब्रांड का दूध मिलता है। इस ब्रांड का मा‍लिकाना हक कर्नाटक को-ऑपरेटिव मिल्‍क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन यानी केएमएफ के पास है।

राज्‍य सरकार की स्‍कीम का असर
हालांकि, राज्‍य में दूध के दाम नहीं बढ़ने का श्रेय कर्नाटक सरकार की स्‍कीम को जाता है। इस स्‍कीम की शुरुआत पूर्व मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा ने की थी। यह बाद में भी जारी रही। बात 2008 की है। तब येदियुरप्‍पा की अगुवाई में बीजेपी सरकार ने 2 रुपये लीटर का प्रोत्‍साहन देना शुरू किया था। यह प्रोत्‍साहन डेयरी किसानों को मिलता था। प्रोत्‍साहन राशि उस खरीद मूल्‍य के ऊपर दी जाती थी कि जिस पर वे केएमएफ से संबद्ध डेयरी यूनियनों को दूध सप्‍लाई करते थे।

आती-जाती रहीं सरकारें पर नहीं बदली स्‍कीम
2013 में कांग्रेस राज्‍य की सत्‍ता में आई थी। तब तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री सिद्धरमैया ने इस इंसेंटिव को बढ़ाकर 5 रुपये लीटर कर दिया। दोबारा येदियुरप्‍पा के आने पर इसमें फिर से बढ़ोतरी हुई। तब इसे बढ़ाकर 6 रुपये लीटर किया गया। इसने डेयरी किसानों को केएमएफ से संबंद्ध डेयरी यूनियनों को दूध की आपूर्ति करने के लिए प्रोत्‍साहित किया। नतीजा यह हुआ कि केएमएफ यूनियनों को दूध की आपूर्ति 2007-08 में रोजाना 30.35 लाख किलो से बढ़कर 74.80 लाख किलो प्रति दिन हो गई।

कर्नाटक सरकार की इस योजना के कारण ही राज्‍य के किसानों के साथ कंज्‍यूमरों को भी फायदा हुआ। किसानों को जहां हर लीटर दूध पर 6 रुपये की अतिरिक्‍त कमाई हुई। तो, दूसरी ओर उपभोक्‍ताओं को दूसरे बड़े शहरों के मुकाबले टोन्‍ड दूध पर 14 रुपये प्रति लीटर कम दाम देना पड़ रहा है।



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