Noida Authority Plot Scheme : क्या आपने खरीदा है या बुक कराया है फ्लैट? फ्रॉड से बचना चाहते हैं तो इन बातों को कभी ना करें नजरअंदाज


नई दिल्ली : घर खरीदना अधिकतर लोगों के जीवन का सबसे बड़ा खर्च होता है। साथ ही अपना घर (House) व्यक्ति के जीवन के सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक होता है। इसलिए घर खरदने से पहले और खरीदने के बाद हमें कई सारी चीजों का ध्यान रखना चाहिए। हाल ही में नोएडा का ट्विन टावर ढहने के बाद फ्लैट्स (Flats) में रहने वाले लोग डरे हुए हैं। लोगों के मन में यह सवाल है कि कहीं उनकी बिल्डिंग भी तो गैरकानूनी (Unauthorised Building) रूप से नहीं बनी है? अगर उनकी बिल्डिंग ढहा दी गई तो उनका फ्लैट भी चला जाएगा। इन सब समस्याओं से बचने के लिए आज हम आपको कुछ टिप्स देने जा रहे हैं। इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि एक ग्राहक को प्रॉपर्टी खरीदने के बाद क्या-क्या करना चाहिए। योगेश तिवारी, सचिन हुड्डा और राजेश भारती ने एक्सपर्ट्स से बात करके यह जानकारी जुटाई है। बताते चलें कि नोएडा अथॉरिटी की आवासीय और औद्योगिक प्लॉट की नई स्कीम (Noida Authority Plot Scheme) 5 सितंबर से लॉन्च हो गई है। अगर आप भी नोएडा में प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो इस स्कीम का लाभ उठा सकते हैं।

प्रोजेक्ट पर रखें नजर
आपने जिस प्रोजेक्ट में अपना फ्लैट बुक कराया है, उस प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन पर नजर रखें। सप्ताह में एक दिन साइट विजिट करने जरूर जाएं। इस दौरान इन चीजों पर नजर रखें:

  • अपने टावर में प्रस्तावित फ्लोर और बन चुके फ्लोर की संख्या देख सकते हैं।
  • सामने ओपन स्पेस बताकर छोड़ी गई जगह पर अगर कोई निर्माण होता मिले तो उस पर भी सवाल उठा सकते हैं।
  • फ्लैट के साथ जिन-जिन सुविधाओं का वादा बिल्डर ने किया है, उनकी भी जानकारी लेनी चाहिए।
  • इनके अलावा पार्क का काम कब से शुरू होगा, इमरजेंसी एग्जिट किधर रहेगा, स्वीमिंग पूल, क्लब, प्ले ग्राउंड व दूसरी सुविधाओं की भी जानकारी लेनी चाहिए और पूछना चाहिए कि इनका निर्माण कब शुरू होगा।
  • अगर कुछ भी प्रस्तावित लेआउट से अलग मिलता है, तो इसे लेकर बिल्डर से सवाल करें। इसके बाद अथॉरिटी में शिकायत कर सकते हैं।


संबंधित अथॉरिटी से लें पूरी जानकारी

अगर किसी शख्स ने फ्लैट खरीद लिया है या वह पहले से रह रहे हैं, तो यह भी चेक करें कि जिस प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट बना है, वह प्रोजेक्ट कानूनी है या गैरकानूनी। इसकी जानकारी संबंधित अथॉरिटी या विभाग से ले सकते हैं। बिल्डर ब्लैक लिस्टिड है या नहीं, इसके बारे में भी जानकारी लेनी चाहिए। अगर गैरकानूनी है तो रेरा में शिकायत करें।

5 साल तक बिल्डर की जिम्मेदारी

बिल्डर कोई प्रोजेक्ट तैयार करता है, तो उसके स्ट्रक्चर (ढांचे) की पांच साल की गारंटी होगी। स्ट्रक्चर में खराबी पाई जाती है, तो उसे दुरुस्त कराने का जिम्मा बिल्डर का होगा। अगर RWA नहीं बना है, तो 5 साल के बाद भी बिल्डर ही देखरेख करता है। ऐसे में वह मेंटेनेंस चार्ज लेता है।

रेडी-टु-मूव फ्लैट खरीदते समय ये बातें जांच लें

  • सबसे पहले तो बिल्डर व बायर एग्रीमेंट को अच्छे से पढ़ें।
  • फ्लैट लेने से पहले बिल्डर के लाइसेंस को देखें, प्रोजेक्ट का रेरा नंबर है या नहीं, उसके दस्तावेज देखें और उसका ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट चेक करें। यह तभी मिलता है जब वह पानी, बिजली, सीवर और दूसरी मूलभूत सुविधाओं को विकसित कर देता है।
  • यह चेक कर लें कि बिल्डर ने स्थाई बिजली कनेक्शन लिया है या नहीं।
  • ले आउट प्लान की भी जांच करें।
  • अगर बिल्डर यह सब दस्तावेज नहीं दिखा रहा है, तो संबंधित अथॉरिटी के ऑफिस से भी इन सभी चीजों की जानकारी ली जा सकती है।
  • यह भी जांचें कि बिल्डर ने इस जमीन पर पहले कोई लोन तो नहीं लिया है। अगर जमीन या बिल्डिंग पर बैंक लोन है, तो रजिस्ट्री कराने में दिक्कत आती हैं।

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बिल्डिंग की मजबूती जरूर परखें

  • बिल्डिंग को सरकार से मान्यता प्राप्त स्ट्रक्चर इंजीनियर से पास कराना होता है। उसके द्वारा सर्टिफिकेट दिया जाता है कि बिल्डिंग भूकंप रोधी है या नहीं। संबंधित अथॉरिटी में जाकर इन सर्टिफिकेट की जांच की जा सकती है।
  • आर्किटेक्ट काउंसिल से अप्रूव्ड अर्किटेक्ट से भी यह जांच कराई जा सकती है।
  • बिल्डिंग के मेटिरियल की क्वॉलिटी, मजबूती आदि की जांच के लिए अच्छे आर्किटेक्ट की मदद ली जा सकती है।
  • टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के माध्यम से भी किसी बिल्डिंग का स्ट्रक्चर ऑडिट करा सकते हैं।
  • फ्लैट की मजबूती की भी जांच खुद से भी करवा सकते हैं। 800-900 स्क्वेयर फुट वाले साइज के फ्लैट के लिए लगभग 10 हजार रुपये में जांच कराई जा सकती है और रिपोर्ट एक सप्ताह में मिल जाती है।



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