Plant Based Meat: सिर्फ पशुओं से ही नहीं, पौधों से भी मिलता है मीट, टाटा और आईटीसी जैसी कंपनियां बना रही हैं इसे


नई दिल्ली: प्लांट बेस्ड मीट (Plant Based Meat)। आपने नाम सुना है? आपके लिए भले ही यह टर्म नया है, लेकिन कारोबारी दुनिया में यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। तभी तो टाटा (Tata Group) और आईटीसी (ITC) जैसी बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में कूद पड़ी हैं। इसका कारोबार छलांग लगा रहा है। ऐसा अनुमान है कि साल 2030 तक इसका कारोबार एक अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

क्या होता है प्लांट बेस्ड मीट
प्लांट बेस्ड मीट देखने में तो पशुओं का मांस जैसा ही दिखता है। लेकिन यह दरअसल वह होता नहीं है। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये पशु मांस की तरह ही दिखते हैं। ये उत्पाद पहले से ही बिक रहे हैं और उन्हें टोफू और सीतान जैसे सोया चॉप जैसे नामों से जाना जाता है। अब इन्हें इस तरह से बनाया जा रहा है कि ये स्वाद, बनावट, गंध में असल मांस की ही तरह लगे। इन्हें आम तौर पर पौधे से मिलने वाली फलियां, सोयाबीन या मसूर, क्विनोआ, मटर, नारियल का तेल, और गेहूं से मिलने वाली ग्लूटेन आदि से बनाया जाता है।

दुनिया भर में खूब बिकने लगा है
प्लांट बेस्ड मीट टर्म भारत के लिए भले ही नया हो, लेकिन यह दुनिया भर में खूब बिकने लगा है। आप विदेशों में किसी लक दक मॉल या सुपरमार्केट में टहलने जाते हैं तो आपको प्रोससेस्ड फूड वाले स्टॉल पर प्लांट बेस्ड मीट के खूब प्रोडक्ट दिखेंगे। यह अब होटल और रेस्टोरेंट में भी आम हो चला है। इस समय पशुओं के अधिकार और शाकाहार की कुछ विशेष बात हो रही है। इसलिए प्लांट बेस्ड मीट की मांग भी बढ़ रही है। तभी तो दुनिया भर की कंपनियां इस कारोबार को हथियाने के लिए कूद रही हैं।

भारत में भी तेजी से बढ़ रही है मांग
भारत में भी प्लांट बेस्ड मीट की मांग तेजी से बढ़ रही है। तभी तो दैनिक उपभोग के सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली बड़ी कंपनियां अब मांसाहारी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए प्लांट बेस्ड मीट सेगमेंट में भी प्रवेश करने लगी हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। हालांकि यह सेगमेंट दो साल पहले ही खुला है, लेकिन अनुमान है कि वर्ष 2030 तक लगभग एक अरब डॉलर हो जाएगा।

होटल और रेस्टोरेंट में भी मिलने लगे हैं प्रोडक्ट
अब प्लांट बेस्ड मीट होटल, रेस्टोरेंट एवं कैटरिंग में भी खूब चलने लगे हैं। भारत की बात करें तो यहां डोमिनोज और स्टारबक्स जैसी कई रेस्टोरेंट चेन ने भी अपने मेन्यू में प्लांट बेस्ड प्रोटीन प्रोडक्ट्स को जगह दी है। अब तो कई इंस्टीच्यूशनल कैटरिंग सर्विस में भी इसे स्थान मिलने लगा है।

टाटा और आईटीसी जैसी कंपनियां आ रही हैं
टाटा समूह की कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट लिमिटेड (TCPL) ने पिछले हफ्ते एक नए ब्रांड ”टाटा सिम्पली बेटर” के तहत प्लांट बेस्ड मीट प्रोडक्ट्स की श्रेणी में कदम रखा था। टाटा समूह की इस कंपनी का कहना है कि प्लांट बेस्ड मीट पर्यावरण एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रभावों के बगैर पशुओं के मांस का विकल्प पेश करता है। आईटीसी ने भी इस साल की शुरुआत में इस खंड में प्रवेश किया था। इस विकल्प में शाका हैरी और विराट कोहली एवं अनुष्का शर्मा के वित्तपोषण वाले ब्लू ट्राइब जैसे स्टार्टअप भी कदम रख चुके हैं।

और भी कंपनियां आएंगी
एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज के कार्यकारी निदेशक अवनीश रॉय के अनुसार, लंबी अवधि में अधिक एफएमसीजी कंपनियां इस खंड में प्रवेश करेंगी। रॉय ने कहा, “मुझे लगता है कि नेस्ले, एचयूएल, मैरिको यह आकलन कर सकती हैं कि इस खंड के बड़ा हो जाने पर अगले पांच वर्षों में प्रवेश करना है या नहीं।”



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