Railway News: ट्रेन में बर्थ के लिए टीटीई की नहीं करनी होगी चिरौरी, इस मशीन से हो रही है यात्रियों की दिक्कत दूर


बाजार का एक सामान्य सा सिद्धांत है। जिस चीज की मांग ज्यादा और सप्लाई कम (Demand Supply Theory) हो, तो उसकी डिमांड बढ़ जाती है। रेलवे के कुछ लोकप्रिय ट्रेनों (Popular Train) में ऐसा ही होता है। ट्रेन में खाली बर्थ या सीट सीमित संख्या में होती है और उसे लेने वाले ढेरों। ऐसे में कभी कभी सुनने में आता है कि टीटीई ने मोटी रकम लेकर बर्थ या सीट किसी यात्री को दे दी और आरएसी (RAC) या वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजर (Waitlisted Passenger) मुंह ताकते रह गए। इस तरह की घटना पर रोक लगे, इसके लिए रेलवे ने टीटीई को हैंड हेल्थ डिवाइस या टर्मिनल (Hand Held Terminal) देना शुरू किया है। आइए, विस्तार से जानते हैं इसके बारे में…

प्रीमियम ट्रेनों में शुरू हुई नई व्यवस्था

भारतीय रेल कुछ प्रीमियम ट्रेनों का संचालन करता है। इनमें राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी ट्रेनें शामिल हैं। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि देश भर में चलने वाली ऐसी करीब 150 ट्रेनों के टिकट चेकिंग स्टाफ को हैंड हेल्ड टर्मिनल दे दिया गया है। इन ट्रेनों में अब टीटीई के पास कागज पर छपा रिजर्वेशन चार्ट नहीं होता है। ये यात्रियों की उपस्थिति का जायजा या अटेंडेंस इसी डिवाइस पर लेते हैं। उसमें जो खाली सीट या बर्थ होते हैं, वह आरएसी या वेट लिस्टेड पैसेंजर को दे दिया जाता है।

शीघ्र ही 1,000 ट्रेनों में होगी यही व्यवस्था

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रेल मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस समय देश के करीब 1,000 ट्रेनों के टीटीई को भी हैंड हेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए पहले ही 10 हजार हैंड हेल्ड टर्मिनल का आर्डर दिया गया था। इसकी आपूर्ति शुरू हो गई है। इसी सप्ताह नई दिल्ली से प्रयागराज या इलाहाबाद के बीच चलने वाली ट्रेन प्रयागराज एक्सप्रेस के टीटीई को यह डिवाइस दिया गया है। इसके साथ ही कुछ अन्य ट्रेनों में भी यह सुविधा शुरू हो रही है। इसके लिए टीटीई को धीरे धीरे ट्रेंड किया जा रहा है।

क्या है हैंड हेल्ड टर्मिनल

रेलवे बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि हैंड होल्ड टर्मिनल टैबलेट की तरह दिखने वाला एक डिवाइस है। यह जीपीएस के जरिए हेडक्वार्टर से कनेक्टेड रहता है। इसमें मोबाइल फोन का एक सिम लगा रहता है, जिससे डिवाइस को कनेक्टिविटी मिलती है। जिस ट्रेन के टीटीई के पास यह डिवाइस होता है, उसमें उस ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट अपलोड रहता है। टीटीई इसी डिवाइस पर यात्रियों का अटेंडेंस लेता है। इससे हेडक्वार्टर में बैठे अधिकारियों को तत्काल पता चल जाता है कि किसी ट्रेन के किसी क्लास में कितने पैसेंजर आए और कितने नहीं आ पाए। यदि इसमें गलत ढंग से किसी को सीट या बर्थ अलॉट करता है तो उसकी जानकारी भी संबंधित अधिकारी को मिल जाती है।

क्या है इस डिवाइस का फायदा

रेलवे का कहना है कि इस डिवाइस के कई फायदे हैं। पहला फायदा तो यह है कि टीटीई के हाथ में जो कई पन्नों का रिजर्वेशन चार्ट रहता है, उसे प्रिंट नहीं करना होगा। मतलब कि हर रोज टनों कागज की बचत होगी। कागज की बचत मतलब पर्यावरण की रक्षा। क्योंकि कागज बनाने के लिए हर रोज सैकड़ों पेड़ काटने होते हैं। सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि ट्रेन की खाली सीट या बर्थ के बारे में तुरंत जानकारी मिल जाएगी। अभी कागजी व्यवस्था होने की वजह से जब तक टीटीई नहीं बताता, तब तक यात्री को पता ही नहीं चलता है कि किसी ट्रेन में कितने बर्थ खाली हैं। पारदर्शिता के अभाव में कोई कोई टीटीई मनमानी कर जाता है।

आरएसी और वेट लिस्टेड यात्री को क्या होगा फायदा

अभी इस तरह की शिकायत अक्सर सुनने को मिलती है। किसी लोकप्रिय ट्रेन में आरएसी (Reservation Against Cancellation) और वेट लिस्टेड पैसेंजर (Wait Listed Passenger) को नियमानुसार खाली बर्थ या सीट नहीं मिली। टीटीई ने किसी को फेवर करते हुए सीट या बर्थ अलॉट कर दिया। कई बार तो सुनने में आता है कि टीटीई ने मोटी रकम ले कर अपात्र यात्री को सीट दे दिया। यह सब शिकायत इस हैंड हेल्ड टर्मिनल से दूर हो जाएगी। क्योंकि यह मशीन ही अपने आप सीट या बर्थ अलॉट कर देगा।

कैसे काम करेगा सिस्टम

रेलवे बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि किसी ट्रेन के किसी क्लास में यदि कुछ बर्थ या सीट खाली रह जाते हैं तो उसका अलाटमेंट टीटीई नहीं करेगा। यह आलॉटमेंट अपने आप सिस्टम ही करेगा। उनका कहना है कि यदि किसी कोच में दो सीटें खाली मिलती हैं तो चार्ट फाइनल होते वक्त जिन यात्री का आरएसी वन और टू रहा होगा, उन्हें कंफर्म बर्थ मिल जाएगा। यदि किसी ट्रेन में ज्यादा सीटें खाली होंगी तो पहले आरएसी को क्लियर किया जाएगा। उसके बाद जो बर्थ बचेंगी, उसे वेटलिस्टेड पैसेंजर को अलॉट किया जाएगा।



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