Rakesh Jhunjhunwala News: राकेश झुनझुनवाला को क्‍यों नहीं छू पाई बाजार में उठापटक की आंधी? भारत के वॉरेन बफेट की तरकीब समझ‍िए


नई दिल्‍ली: दिग्‍गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) को भारत का वॉरेन बफेट (Warren Buffet) कहा जाता है। उनकी सूझबूझ की मिसाल दी जाती है। इसकी बानगी कई बार मिल चुकी है। यह दोबारा सामने आई है। चालू वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान बाजार में काफी उठापटक थी। लोग इससे घबराए हुए थे। तमाम इस घबराहट में बाजार को छोड़कर भाग गए। हालांकि, राकेश झुनझुनवाला इस दौरान बिल्‍कुल शांत रहे। उनके पोर्टफोलियो (Investment Portfolio) से इसका पता चलता है। इस दौरान उनके पोर्टफोलियो में कमोबेश कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। बाजार में उठापटक के दौर में अति उत्‍साहित नहीं होना चाहिए। अक्‍सर कही जाने वाली यह बात उनके मामले में सही साबित हुई। इस दौरान बंबई शेयर बाजार (BSE) का सेंसेक्‍स और नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (NSE) का निफ्टी 9 फीसदी से ज्‍यादा लुढ़के। महंगाई की चिंता और विदेश पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बेरुखी के कारण ऐसा हुआ। इस दौरान एफपीआई ने घरेलू बाजारों में ताबड़तोड़ बिकवाली की। इस गिरावट से निवेशकों को करीब 20 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

झुनझुनवाला ने क्‍या बेचा क्‍या खरीदा?
राकेश झुनझुनवाला के हर कदम पर बाजार की नजर रहती है। कारण भी है। वह जिस जगह हाथ डाल देते हैं वहां खेल पलट जाता है। उनसे यह भी सीखा जा सकता है कि हमेशा आक्रामकता सही नहीं होती है। कभी-कभी चुपचाप बैठ जाने में ही भलाई है। कॉरपोरेट डेटाबेस ऐस इक्विटी के अनुसार, वित्‍त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में झुनझुनवाला का सबसे बड़ा दांव टाइटन पर रहा। इसमें झुनझुनवाला और उनकी पत्‍नी रेखा की 5.05 फीसदी हिस्‍सेदारी बनी थी। 26 जुलाई, 2022 तक टाइटन का झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में कुल मूल्य लगभग 10,300 करोड़ रुपये था। स्टार हेल्थ में उनकी हिस्सेदारी 14.39 फीसदी थी। यानी इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। फोर्टिस हेल्थकेयर में यह 4.23 फीसदी, केनरा बैंक में 1.96 फीसदी और क्रिसिल में 2.92 फीसदी थी। उनकी पत्नी की भी स्टार हेल्थ में 3.10 फीसदी और क्रिसिल में 2.56 फीसदी हिस्सेदारी थी। यानी उनके पोर्टफोलियो में ज्‍यादा बदलाव नहीं हुआ।

पिछली तिमाही में झुनझुनवाला की एकमात्र खरीद मिड-कैप कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा थी। इसमें उन्होंने 1.39 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके उलट उन्‍होंने जून तिमाही के दौरान टाटा मोटर्स के 30 लाख शेयर बेचे। उन्होंने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस में अपनी हिस्सेदारी 1.28 फीसदी से घटाकर 1.17 फीसदी कर दी। डेल्टा कॉर्प, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, नाल्को और टीवी18 ब्रॉडकास्ट में उनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी नीचे आ गई।

उठापटक के बावजूद झुनझुनवाला और उनकी पत्नी के पास 26 जुलाई तक 27,300 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के शेयर थे। 30 जून, 2022 तक दोनों की 30 से ज्‍यादा कंपनियों में हिस्सेदारी थी। जबकि वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही के अंत में इनकी संख्‍या 35 थी।

आपको क्‍या करना चाहिए?
ज्‍यादातर एक्‍सपर्ट्स निवेशकों को एक बात की सलाह हमेशा देते हैं। वे कहते हैं कि कभी बड़े निवेशकों के पीछे नहीं भागना चाहिए। आंख मूंदकर ऐसा करने की रणनीति नुकसान पहुंचा सकती है। कारण है कि निवेश के आवंटन और इसे लगाने के तर्क को लेकर कभी पूरा डेटा उपलब्‍ध नहीं होता है। हर एक निवेशक का अपना लक्ष्‍य होता है। इस लक्ष्‍य को पाने की समयसीमा भी अलग-अलग होती है। जोखिम लेने की क्षमता में भी अंतर होता है। लिहाजा, इन सभी बातों को ध्‍यान में रखकर ही न‍िवेश का फैसला करना चाहिए।



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