Unfair Trade Practice: कार के पैसे लिए थे पूरे लेकिन थमा दी पुरानी कार, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?


नई दिल्ली: ग्राहकों से पूरा पैसा लेकर भी नया सामान या उचित सेवा नहीं देना आपको महंगा पड़ सकता है। ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के संज्ञान में आया है। कोर्ट ने कहा है कि पूरी राशि लेने के बाद भी नई कार नहीं देना अनुचित व्यापार गतिविधि “Unfair Trade Practice” है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरी राशि लेने के बाद भी नई कार की डिलिवरी नहीं करना डीलर की बेईमानी को बताता है और यह नैतिकता के खिलाफ भी है। कोर्ट ने कार खरीद से जुड़े एक मामले में यह टिप्पणी की है।

एक साल बाद मिली डिलीवरी
शिकायकर्ता ने आरोप लगाया था कि कार की पूरी राशि जमा करने के एक साल बाद उसे वाहन की डिलिवरी की गई। शिकायकर्ता ने दावा किया कि उसे जो कार दी गयी, वह पुरानी थी। डीलर ने उस कार का उपयोग ‘डेमो टेस्ट ड्राइव’ के रूप में किया था।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
न्यायाधीश एम आर शाह और न्यायाधीश कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (NCDRC) के जनवरी, 2016 में दिये गये फैसले को रद्द कर दिया। एनसीडीआरसी ने डिस्ट्रिक फोरम (District Forum) के उस निष्कर्ष को खारिज कर दिया था कि मामले में दी गई कार एक इस्तेमाल की गई गाड़ी थी। जबकि फोरम के आदेश की पुष्टि राज्य आयोग ने की थी। आयोग ने मामले में जिला मंच के आदेश को संशोधित करते हुए निर्देश दिया था कि शिकायकर्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

डिस्ट्रिक फोरम ने क्या कहा था
डिस्ट्रिक फोरम ने डीलर को कार वापस लेने और पूर्व में जमा की गई राशि के एवज में शिकायतकर्ता को नया वाहन देने का निर्देश दिया था। साथ ही शिकायकर्ता की मानसिक पीड़ा के लिए 5,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 2,500 रुपये देने को कहा था। शिकायकर्ता ने एनसीडीआरसी के निर्णय को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

डीलर की बनती है जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिकायकर्ता ने नई कार ‘बुक’ की थी और पूरी राशि का भुगतान किया था। ऐसे में डीलर की जिम्मेदारी थी कि वह उसे नई कार देता। पीठ ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय आयोग ने भी पाया है कि जो कार दी गयी, उसमें गड़बडी थी। नई कार की जगह खराब कार देना भी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है… पैसे लेकर सही गाड़ी नहीं देना अनुचित व्यापार गतिविधि है।’’ न्यायालय ने कहा कि जिला मंच और राज्य आयोग का डीलर को नई कार देने का निर्देश बिल्कुल उचित था।

एनसीडीआरसी का फैसला निरस्त
पीठ ने एनसीडीआरसी के फैसले को निरस्त करते हुए जिला मंच के अप्रैल, 2011 के आदेश को बहाल कर दिया। इस आदेश की राज्य आयोग ने भी पुष्टि की थी।

(PTI के इनपपुट के साथ)



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